Lal Bahadur Shastri : Biography, Quotes, Essay, History, Info: News Blog

Lal Bahadur Shastri: Jai Jawan Jai Kisan.

आज देश  Lal Bahadur Shastri को उनकी 53वी पुण्यतिथि पर नारे Jai Jawan Jai Kisan के साथ Biography, Quotes, Essay, History को याद कर रहा है: True News India

Lal Bahadur Shastri Photo.

भारत के दूसरे प्रधानमंत्री (2nd Prime Minister of India) श्री लाल बहादुर शास्त्री जी (Lal Bahadur Shastri) को आज भी उनके व्यवहार और सादगी के लिए याद किया जाता है। देश के दूसरे प्रधानमंत्री (2nd Prime Minister of India) श्री लाल बहादुर शास्त्री (Shri Lal Bahadur Shastri) का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को मुगलसराय, उत्तर प्रदेश में हुआ था। शास्त्री जी का जीवन उनके बचपन के दिनों से ही संघर्षों से भरा रहा, वह स्कूल पढ़ने भी नदी पार करके जाया करते थे । श्री लाल बहादुर शास्त्री (Shri Lal Bahadur Shastri) के बारे में अब आप सोच लीजिए उन्होंने लेकिन अपने जीवन के सभी संघर्षों को पार करते हुए शास्त्री जी अपने बुलंद इरादों से जीवन में आगे बढ़े और देश के दूसरे प्रधानमंत्री (2nd Prime Minister of India)  के रूप में सामने आए । शास्त्री जी की मौत 11 जनवरी 1966 को ताशकंद, उज़बेकिस्तान में हुई थी हुई थी।

मेरे विचार से पूरे देश के लिए एक संपर्क भाषा का होना आवश्यक हैअन्यथा इसका तात्पर्य यह होगा कि भाषा के आधार पर देश का विभाजन हो जाएगा। एक प्रकार से एकता छिन्न-भिन्न हो जाएगी........ भाषा एक ऐसा सशक्त बल हैएक ऐसा कारक है जो हमें और हमारे देश को एकजुट करता है। यह क्षमता हिन्दी में है"


आइए जानते है ताशकंद में अचानक हुई पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की मौत की कहानी ?

देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के जीवन में सबसे ज्यादा विवादास्पद ताशकंद में हुई उनकी मौत की घटना रही है ? जिसके राज आज तक सामने नही आये है । लाल बहादुर शास्त्री की ताशकंद में हुई मौत पर बॉलीवुड के जाने माने डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री फ़िल्म बना रहे है, जिसका नाम है 'द ताशकंद फाइल्स' ।

हाल ही में देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार संजय बारू के द्वारा लिखी किताब द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर (The Accidental Prime Minister) पर फ़िल्म का ट्रेलर रिलीज किया गया था,जिसे लेकर काफी विवाद हुआ और मामला कोर्ट तक भी जा पहुँचा । अब देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी पर विवेक अग्निहोत्री ने द ताशकंद फाइल्स (The Tashkand Files) नाम की फ़िल्म बनाई है । जिसको लेकर भी विवाद हो सकता है । हालांकि इस फ़िल्म की कहानी मौत के वक्त उनके होटल में ही मौजूद पत्रकार कुलदीप नैयर के अनुसार है । कुलदीप नैयर के अनुसार कैसे यह सब घटना घटित हुई थी ? यह इस फ़िल्म में बताया जाएगा ।

सन 1965 में भारत ने पाकिस्तान के कश्मीर पर हमले के बाद कच्छ की तरफ से पाकिस्तान (Pakistan) में सेना (Force) को भेजने का प्लान बनाया और फ़ोर्स ने पाकिस्तान के इलाकों पर अतिक्रमण कर लिया था । लेकिन उस समय देश के प्रधानमंत्री रहे लाल बहादुर शास्त्री ने 1966 में हुए ताशकंद समझौते में पाकिस्तान को हाजी पीर और ठिथवाल को पाकिस्तान में भारतीय सेना द्वारा जीते इलाके को वापस कर दिया था । इस समझौते से लाल बहादुर शास्त्री की देश मे काफी आलोचना हुई थी ।

वही मीडियाकर्मी कुलदीप नैयर बताते है कि उस दिन देर रात शास्त्री जी अपने घर पर फोन मिलाया । फोन को रिसीव शास्त्री जी की सबसे बड़ी बेटी ने उठाया । फोन जैसे ही उठाया गया वैसे ही शास्त्री जी बोले, 'अम्मा को फोन दो , उनकी बेटी ने जवाब दिया, कि  अम्मा फोन पर आपसे बात नही करेंगी, शास्त्री जी ने पूछा क्यों ? जवाब आया यही आया क्योंकि आपने हाजी पीर और ठिथवाल पाकिस्तान को दे दिया है । जिससे अम्मा बहुत नाराज हैं । लाल बहादुर शास्त्री जी को इसी बात का धक्का लगा ।

Video Credit: I Am Buddha

इस घटना के बाद शास्त्री जी काफी परेशान हो गए हालांकि कुछ ही देर में उन्होंने फिर से अपने सचिव वेंटररमन को फोन भी किया था । शास्त्री जी भारत में नेताओं की प्रतिक्रिया जानना चाहते थे । उनके सचिव वेंटररमन ने उन्हें बताया गया कि अभी तक दो ही प्रतिक्रियाएं आई हैं, जिसमें से एक अटल बिहारी वाजपेयी की और दूसरी कृष्ण मेनन की ओर दोनो ने ही आपके इस कदम की काफी आलोचना करि है ।

कुलदीप आगे बताते हैं कि उस समय भारत-पाकिस्तान के बीच हुए ताशकंद समझौते की खुशी में होटल में पार्टी चल रही थी और चूंकि वे शराब नहीं पीते थे तो वे अपने कमरे में आकर सो गए । सपने में कुलदीप ने देखा कि लाल बहादुर शास्त्री जी का देहांत हो गया है । कुलदीप की नींद जब खुली तब उनके होटल के कमरे के दरवाजे को किसी ने खटखटाया । दरवाजा खोलते ही उनके सामने एक रूसी औरत खड़ी थी, जो उनसे बोली, "यॉर प्राइम मिनिस्टर इज दाइंग."

कुलदीप नैयर अपना कोट पहनकर शास्त्री जी के कमरे की तरफ गए । वहाँ उन्होंने देखा कि वहां पर रूसी प्रधानमंत्री कोसिगिन खड़े थे जिन्होंने उनसे कहा, शास्त्री जी नहीं रहे। कुलदीप नैयर बताते हैं कि वहां पर जनरल अयूब भी पहुंचे और कहा, "हियर लाइज अ पर्सन हू कुड हैव ब्रॉट इंडिया एंड पाकिस्तान टुगैदर" ताशकंद समझोते के दौरान उनकी पत्नी नहीं गई थीं ।

लाल बहादुर शास्त्री के बेटे अनिल बताते हैं कि लंबे वक्त तक उनकी मां यह कहती रहीं कि अगर वे शास्त्री जी के साथ इस दौरे पर ताशकंद गई होतीं तो शास्त्री जी की मौत नहीं होती । वैसे यह अकेला दौरा था, जब उनकी पत्नी उनके साथ नहीं गई थीं । बाकी हर छोटे बड़े दौरे पर वह उनके साथ हमेशा जाती थी ।

सन 1993 में ललिता जी का भी देहांत हो गया । देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी को 1966 में मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाज़ा गया । आज भी लोग मानते हैं कि शास्त्री जी की मौत के बाद कई सवालों के उत्तर नहीं दिए जा सके हैं ।

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